गहन सघन मनमोहक वन तरु, मुझको आज बुलाते हैं, किन्तु किये जो वादे मैने याद मुझे आ जाते हैं अभी कहाँ आराम बदा, यह मूक निमंत्रण छलना है अरे अभी तो मीलों मुझको, मीलों मुझको चलना है!! -हरिवंश राय बच्चन शेर सिंह भदौरिया