Hanuman chalisa | Jay shree Ram | ‪@Shivkiduniya375‬ | #viralvideo #shorts |

Hanuman chalisa | Jay shree Ram | ‪@Shivkiduniya375‬ | #viralvideo #shorts |

Hanuman chalisa | Jay shree Ram | @Shivkiduniya375 | #viralvideo #shorts | श्री हनुमान चालीसा 🌺🙏 | Shri Hanuman chalisa original video | @Shivkiduniya375 | #hanumanchalisa Shiv Ki Duniya में आपका स्वागत है 🙏 यहाँ हम आपको भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक कथाएँ, शिव तांडव, मंत्र, भजन, महादेव की महिमा, शिव पुराण की ज्ञानवर्धक कहानियाँ और आध्यात्मिक वीडियो प्रस्तुत करते हैं। हमारा उद्देश्य है कि हर भक्त तक महादेव का संदेश और शिवत्व की शक्ति पहुँचे। हर हर महादेव 🔱 👉 चैनल को सब्सक्राइब करें 👉 वीडियो को लाइक व शेयर करें 👉 बेल आइकन दबाएँ ताकि हर नया वीडियो सबसे पहले आप तक पहुँच सके 🔱hanuman chalisa shree hanuman chalisa jai hanuman gyan gun sagar shri hanuman chalisa hanuman chalisa hariharan hanuman chalisa full hanuman chalisa fast chalisa hanuman hanuman chalisa gulshan kumar hanuman chalisa original hanuman chalisa lyrics fast hanuman chalisa hanuman chalisa live gulshan kumar hanuman chalisa live hanuman chalisa hanuman chalisa super fast super fast hanuman chalisa hanuman chalisha lord hanuman live hanuman bhajan nonstop hanuman chalisa live hanuman bhajan bhajan hanumaan हनुमान चालीसा chaalisa hanuman chalisa hariharan full hanuman chalisa hariharan full lyrics hanuman hanuman chalisa hariharan lyrics chalisa shree hanuman chalisa hariharan lyrics shree hanuman chalisa hariharan song hanuman jayanti hanuman chalisaa जय हनुमान ज्ञान गुण सागर | #ShivKiDuniya #Mahadev #HarHarMahadev #Bholenath #ShivPuran #Mahakal #ShivBhakti #Shankar #Shiva #ShivKatha #Devotional #HinduDharm #SanatanDharma यह रही श्री हनुमान चालीसा (पूर्ण पाठ – हिंदी में) 🙏🚩 श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ युग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्ह