बहुत ही प्यारा गुरुदेव भजन Hey Gurudev Pranam  हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों मे

बहुत ही प्यारा गुरुदेव भजन Hey Gurudev Pranam हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणों मे

🌸 जय गुरुदेव | गुरुदेव तुम्हारे चरणों में सत कोटि प्रणाम | Hey Gurudev Pranam 🌸 “गुरुदेव तुम्हारे चरणों में सत कोटि प्रणाम…” यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि शिष्य के हृदय से निकली हुई सच्ची प्रार्थना है। जब जीवन की राहें उलझ जाती हैं, जब मन अंधकार में भटकने लगता है, तब गुरुदेव ही वह दिव्य प्रकाश हैं, जो हमें सही दिशा दिखाते हैं। यह प्रार्थना गुरु भक्ति, कृतज्ञता और पूर्ण समर्पण का भाव प्रकट करती है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि — ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग गुरु के चरणों से होकर ही जाता है। 🌼 गुरुदेव का महत्व — जीवन का सच्चा आधार 🌼 गुरुदेव केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, वे अज्ञान के अंधकार को मिटाने वाले, जीवन को दिशा देने वाले, और आत्मा को परम सत्य से जोड़ने वाले होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है — “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः” अर्थात गुरु ही सृष्टि, पालन और संहार — तीनों के प्रतीक हैं। यह प्रार्थना उसी सनातन भाव को शब्द देती है। 🌸 “Hey Gurudev Pranam” — भावार्थ 🌸 इस प्रार्थना में शिष्य कहता है — “हे गुरुदेव! मैं जो कुछ भी हूँ, जो कुछ भी जान पाया हूँ, जो भी सही मार्ग पर चल सका हूँ — वह सब आपकी कृपा से ही संभव हुआ है।” यह भाव अहंकार के विसर्जन और पूर्ण कृतज्ञता का प्रतीक है। 🌼 गुरु चरण — मोक्ष का द्वार 🌼 गुरु के चरणों में झुकना का अर्थ है — ✨ अपने अहंकार को त्याग देना ✨ अपने ज्ञान को अपूर्ण मान लेना ✨ और गुरु की कृपा में स्वयं को सौंप देना कहा जाता है — जहाँ गुरु की कृपा होती है, वहाँ भाग्य भी झुक जाता है। यह प्रार्थना उसी विश्वास की अभिव्यक्ति है। 🌸 भजन का आध्यात्मिक संदेश 🌸 यह प्रार्थना हमें सिखाती है कि — 👉 केवल पढ़ा-लिखा होना ज्ञान नहीं है 👉 सच्चा ज्ञान वही है जो जीवन को बदल दे 👉 और वह परिवर्तन गुरु की कृपा से ही आता है “जय गुरुदेव” का उच्चारण मन को शुद्ध करता है और हृदय में विनम्रता भर देता है। 🌼 जीवन में गुरु भक्ति का प्रभाव 🌼 जो शिष्य सच्चे मन से गुरुदेव की शरण में आ जाता है — 🙏 उसका भय दूर हो जाता है 🙏 उसके कर्म शुद्ध होने लगते हैं 🙏 उसका मन शांत होने लगता है 🙏 उसके जीवन में संतुलन आता है 🙏 और धीरे-धीरे आत्मा जागृत होने लगती है यह प्रार्थना उसी आंतरिक यात्रा की शुरुआत है।