खरगोश और कछुआ  Rabbit and Tortoise  Hindi Stories for Kids

खरगोश और कछुआ Rabbit and Tortoise Hindi Stories for Kids

‪@adityabroadcast‬ एक घने जंगल में तरह-तरह के जानवर रहते थे। उन्हीं में से दो थे—एक फुर्तीला, तेज़-तर्रार खरगोश, और दूसरा धीमा पर बेहद संयमी कछुआ। दोनों स्वभाव में बहुत अलग थे। जहाँ खरगोश अपनी गति पर घमंड करता रहता था, वहीं कछुआ शांत और धैर्यवान था। अक्सर खरगोश जंगल के अन्य जानवरों के सामने अपना बड़प्पन दिखाता और अपनी तेज़ दौड़ पर शेखी बघारा करता था। एक दिन जंगल में सभी जानवर इकट्ठा थे। हमेशा की तरह खरगोश कछुए का मज़ाक उड़ाते हुए बोला, “तुम इतने धीरे चलते हो कि अगर मैं सो भी जाऊँ, तो भी तुम मुझे नहीं हरा सकते!” कछुआ यह सुनकर मुस्कुराया और शांत स्वर में बोला, “खरगोश भाई, तेज़ होना अच्छी बात है, लेकिन निरंतरता उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। क्यों न हम एक दौड़ लगाएँ और देख लें कि वास्तव में जीतता कौन है?” खरगोश हँस पड़ा, लेकिन चुनौती स्वीकार कर ली। जंगल के जानवर उत्साहित हो गए और अगले दिन एक बड़ी दौड़ का आयोजन किया गया। दौड़ की शुरुआत एक पुराने बरगद के पेड़ से होती और नदी के किनारे स्थित एक बड़े पत्थर पर खत्म होती। अगले दिन जैसे ही सूरज निकला, सभी जानवर पहुँचे। तोता जज बना और उसने जोर से घोषणा की, “तीन… दो… एक… शुरू!” खरगोश बिजली की तरह दौड़ा और देखते ही देखते दूर निकल गया। कछुआ अपनी सामान्य रफ्तार से धीरे-धीरे चलता रहा। थोड़ी देर बाद खरगोश पीछे मुड़ा तो कछुआ बहुत पीछे दिखाई दिया। वह घमंड से हँसते हुए बोला, “इसमें तो कोई मुकाबला ही नहीं! क्यों न थोड़ा आराम कर लूँ?” खरगोश एक पेड़ की छाया में लेट गया और पलक झपकते ही गहरी नींद में सो गया। दूसरी ओर कछुआ बिना रुके, बिना थके लगातार आगे बढ़ता रहा। उसे पता था कि वह तेज़ नहीं दौड़ सकता, लेकिन वह रुककर समय बर्बाद भी नहीं कर सकता। धीरे-धीरे चलता हुआ कछुआ उस स्थान पर पहुँच गया जहाँ खरगोश सो रहा था। उसने बिना ध्यान दिए अपना सफर जारी रखा। समय बीतता गया और कछुआ अंततः फिनिश लाइन तक पहुँच गया। सभी जानवर खुश होकर तालियाँ बजाने लगे। शोर सुनकर खरगोश की नींद खुली। उसने देखा कि सूरज ढलने को है और कछुआ कहीं दिखाई नहीं दे रहा। घबराकर वह दौड़ पड़ा, लेकिन जब तक वह फिनिश लाइन पर पहुँचा, तब तक कछुआ विजेता घोषित किया जा चुका था। खरगोश शर्मिंदा था। उसने कछुए से माफी माँगी और समझ गया कि केवल तेज़ होने से जीत नहीं मिलती, बल्कि निरंतरता और धैर्य भी जरूरी है। कछुआ मुस्कुराते हुए बोला, “जीत-हार से ज़्यादा महत्वपूर्ण है—अपने प्रयास में स्थिर रहना।” कहानी की सीख: अधिक गति से नहीं, निरंतर प्रयास से सफलता मिलती है। अहंकार हमेशा नुकसान पहुँचाता है।