लक्ष्मी माता हिंदू धर्म में धन, समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य की देवी हैं। इन्हें श्री, कमला, पद्मा जैसे नामों से भी जाना जाता है। माता लक्ष्मी की आकृति अत्यंत मनमोहक और दिव्य है। *लक्ष्मी माता का स्वरूप:* *रूप:* लक्ष्मी माता को सुंदर, सौम्य और शांत स्वरूप में दर्शाया जाता है। उनका रंग स्वर्णिम या सुनहरा होता है, जो समृद्धि और प्रकाश का प्रतीक है। *वस्त्र और आभूषण:* वे लाल, गुलाबी या सुनहरे रंग के सुंदर वस्त्र पहनती हैं, जो सौभाग्य और वैभव का प्रतीक हैं। वे स्वर्ण आभूषणों से सुशोभित होती हैं। *हाथ और प्रतीक:* लक्ष्मी माता के चार हाथ हैं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक हैं। उनके दो हाथों में कमल का फूल होता है, एक हाथ से स्वर्ण मुद्राएँ बरस रही होती हैं (धन की वर्षा), और एक हाथ वरद मुद्रा में होता है (आशीर्वाद देने के लिए)। *आसन:* वे कमल के फूल पर विराजमान होती हैं, जो पवित्रता और वैराग्य का प्रतीक है। *सहचर:* उनके साथ अक्सर दो हाथी दर्शाए जाते हैं, जो जल से अभिषेक करते हैं, यह शाही वैभव और शुद्धता का प्रतीक है। *प्रकृति:* लक्ष्मी माता सौम्य, करुणामयी और भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली हैं। वे विष्णु जी की पत्नी हैं और उनके साथ मिलकर विश्व की रक्षा और पालन करती हैं। *प्रतीकात्मक महत्व:* लक्ष्मी माता केवल भौतिक धन की ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समृद्धि, ज्ञान और गुणों की भी प्रतीक हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर की जाती है, जब लोग अपने घरों में स्वच्छता और प्रकाश के साथ उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। *मंत्र:* ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः यह मंत्र उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जपा जाता है। लक्ष्मी माता का स्वरूप और पूजा भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है। क्या आप उनके किसी विशेष पहलू या पूजा विधि के बारे में और जानना चाहेंगे?