राज्य की उत्पत्ति।दैविय उत्पत्ति का सिद्धांत। शक्ति का सिद्धांत

राज्य की उत्पत्ति।दैविय उत्पत्ति का सिद्धांत। शक्ति का सिद्धांत

नमस्कार दोस्तों इस वीडियो में राज की उत्पत्ति का सिद्धांत के विषय में बताया गया है राज की उत्पत्ति के सिद्धांत को लेकर विभिन्न विद्वानों का भिन्न-भिन्न मत है राज्य समाज की पहचान होती है जहां सभ्य समाज होता है वहीं राज्य होता है जहां सभ्य समाज नहीं होता वहां राज्य नहीं होता राज्य की उत्पत्ति के बारे में जानकारी इतिहास से मिलती है जहां इतिहास मौन हो जाता है वहां कल्पना का सहारा लिया जाता है राज्य की उत्पत्ति के निम्नलिखित सिद्धांत है-- देवी उत्पत्ति का सिद्धांत या धार्मिक सिद्धांत। शक्ति का सिद्धांत या बल प्रयोग का सिद्धांत या युद्ध का सिद्धांत। परिवार का सिद्धांत या रक्त संबंध का सिद्धांत। सामाजिक समझौते का सिद्धांत। विकासवादी सिद्धांत या क्रमिक सिद्धांत। ऐतिहासिक सिद्धांत या वैज्ञानिक सिद्धांत। देवीक उत्पत्ति का सिद्धांत या धार्मिक सिद्धांत-- दैविय उत्पत्ति के सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वप्रथम रॉबर्ट फिल्मर ने किया अपनी पुस्तक पैटिर्याका में इनका समर्थन जेम्स प्रथम ने किया अपनी पुस्तक द लॉ ऑफ फ्री मोनार्ची में। जेम्स प्रथम का कथन है राजा लोग पृथ्वी पर ईश्वर की जीवित प्रतिमाएं हैं। फ्रांस में लूई 14वां था इसका प्रतिपादक वैश्वे थे। लुई 14वां का कथन है ,"मैं ही राज्य हूं। फ्रांस में दैविक उत्पत्ति के सिद्धांत के प्रतिपादक वैश्वे थे। इस समय फ्रांस का शासक लुई 14वां था लुई 14वां का कथन था मैं ही राज्य हूं। सभी धर्म का मानना है सभी राजा ईश्वर की प्रतिमाएं हैं/ प्रतिनिधि के रूप में हैं। भारतीय परंपरा में कहा गया है कि सज्जनों की रक्षा के लिए दर्जनों को नष्ट या दंड देने के लिए ब्रह्म या ईश्वर ने राजा को पृथ्वी पर भेजा है। महाभारत में श्री कृष्ण ने भी कहा था मैं ही राज्य हूं। राज्य या राजा को ईश्वर ने बनाया है। राजा किसी को दंड देता है तो प्रजा को किसी जन्म का पाप समझकर दंड को सहन करना चाहिए क्योंकि राजा ईश्वर का प्रतिनिधि है दैविय उत्पत्ति का सिद्धांत यही मानता है। चीन या मित्र के राजा को सूर्यपुत्र तथा देव पुत्र कहकर संबोधित किया गया भारतीय परंपरा और यूरोपीय परंपरा में भी यह माना गया जो पहला राजा आया वह ईश्वर की प्रतिनिधि है देवी उत्पत्ति के सिद्धांत का समर्थन मनु ने भी किया है। मध्यकाल में राजा और पाप से जब युद्ध हुआ तो राजा ने कहा मैं भी ईश्वर का प्रतिनिधि हूं आधुनिक काल में देवी उत्पत्ति के सिद्धांत की स्थापना हुई लेकिन आगे चलकर इसकी कटु आलोचना हुई। आलोचना इसलिए हुई क्योंकि इसका ना तो कोई ऐतिहासिक और न तो कोई वैज्ञानिक और नहीं तर्क पर आधारित थी लेकिन आलोचना के बाद भी देवी उत्पत्ति का सिद्धांत का महत्व था क्योंकि जिस समय लोग एक दूसरे से लड़ रहे थे झगड़ रहते और इधर से उधर भाग रहे थे उसे समय देवी उत्पत्ति के सिद्धांत ने लोगों को इकट्ठा किया और आज्ञा पालन करना सिखाए और राजभक्ति की भावना सभी के मन बसाया इन्हीं सभी कर्म से दैविक उत्पत्ति के सिद्धांत का महत्व है। राज्य की उत्पत्ति का सिद्धांत या युद्ध का सिद्धांत--राज्य युद्ध के बल पर अस्तित्व में आया राज्य में दो वर्ग थे एक सफल वर्ग था और एक निर्बल वर्ग था सबल वर्ग ने निर्बल वर्ग को जीतकर अपने राज्य में मिल लिया इस सिद्धांत के प्रतिपादक ओपेन हाइमर हैं समर्थक थ्री टसके वाल्टर ह्यूम नीत्से। ओपेन हाइमर का कथन है राज्य एक वर्गी संगठन है जिसकी उत्पत्ति युद्ध के द्वारा हुई। गेहूं का कथन है राज्य की उत्पत्ति में युद्ध का हाथ है। तेरी टसके कहते हैं राज्य शक्ति का मूर्त रूप है। वाल्टर कहते हैं प्रथम राजा भाग्यशाली योद्धा था। नित्से ने राज्य के अतिमानों के सिद्धांत का प्रतिपादन किया । मासिया वाली का कथन है निरंकुश राजतंत्र का समर्थन मैकियावेली ने भी किया। मोर्गेंथाऊ ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में राज्य का उद्देश्य शक्ति प्राप्त करना बताया। शिकागो विश्वविद्यालय में शक्ति वादी राज्य का उदय हुआ आलोचक बोध है और ग्रीन बोडा ने कहा शक्ति केवल डाकुओं के गिरोह का संगठन कर सकता है। ग्रीन ने कहा राज्य इच्छा का प्रतीक है शक्ति का नहीं। या राज्य का आधार इच्छा है शक्ति नहीं।