January February song | Altaf Raza | Old is Gold

January February song | Altaf Raza | Old is Gold

जब तुमसे इत्तफ़ाकन मेरी नज़र मिली थी – अब याद आ रहा है , शायद वो जनवरी थी. तुम यू मिली दुबारा , फिर महे फ़रवरी मैं – जैसे की हमसफ़र हो , तुम रहे जिंदगी मैं. कितना हसी जमाना आया था मार्च लेकर, राहे वफ़ा पे थी तुम , वाडो की टोर्च ले कर. बँधा जो अहदे -उलफत अप्रैल चल रहा था, दुनिया बदल रही थी मौसम बदल रहा था लकिन मे जब आई जलने लगा जमाना, हर शक्स की ज़बान पर बस यही था फसाना. दुनिया के दर से तुमने , बदली थी जब निगाहे था जून का महीना , लब पर थी गरम आहे. जुलाइ मैं जब तुमने जब बातचीत कुछ कम , थे आसमा पे बादल और मेरी आँखे पूर नाम. महे ऑगस्ट मैं जब, बरसात हो रही थी. बस आसुओ की बारिश दिन रात हो रही थी. कुछ याद आ रहा है, वो माह था सितंबर , भेजा था तुमने मुझको तार के बफा का लेटर. तुम गेर हो रही थी, अक्टोबर आ गया था. दुनिया बदल चुकी थी, मौसम बदल चुका था जब आ गया नवेंबर ऐसी भी रात आई , मुझसे तुम्हे छुड़ाने साज-कर बारात आई. बे-क्फ था डिसेंबर , जसबात मार चुके थे. मौसम था सर्द उसमे, अरमा पिघल चुके थे लेकिन ये क्या बतौ अब हाल दूसरा है … अरे वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है.