सातवाँ नवरात्र स्पेशल:-कालरात्रि माता कथा | कालरात्रि माता कहानी | Ds Pal | Navratri Day-7~Kalratri

सातवाँ नवरात्र स्पेशल:-कालरात्रि माता कथा | कालरात्रि माता कहानी | Ds Pal | Navratri Day-7~Kalratri

To Get Daily Bhajan Updates Join Our Whatsapp Channel : https://whatsapp.com/channel/0029Vag5... सातवाँ नवरात्र स्पेशल:-कालरात्रि माता कथा | कालरात्रि माता कहानी | Ds Pal | Navratri Day-7~Kalratri Title : कालरात्रि माता कथा Singer : Sontoek ( Ds Pal ) Lyrics : Sontoek ( Fauji Suresh Panchal ) Music : Sonotek ( Lucky Singh ) Company / Label: Live Bhakti Bhajan India #कालरात्रिमाता #KalratriMata #NavratriDay7 #सप्तमीनवरात्रि #सातवाँनवरात्रि #KalratriKatha #कालरात्रिकथा #KalratriStory #KalratriMaa #MaaKalratri #Navratri2025 #NavratriSpecial #KalratriBhajan #DsPal #कालरात्रिभजन #NavratriVratKatha #DeviKatha #जयमातादी #DurgaSaptami #Navdurga Kalratri Mata Katha,Kalratri Mata Story,Navratri Day 7,Navratri Kalratri Katha,कालरात्रि माता की कथा,कालरात्रि माता कहानी,सप्तमी की कथा,सातवाँ नवरात्र,Kalratri Bhajan,Kalratri Aarti,Navdurga Kalratri,Kalratri Puja Vidhi,Maa Kalratri Vrat Katha,Kalratri Devi,Kalratri Mantra,Kalratri Stotra,Ds Pal Kalratri,Navratri 2025 Day 7,Kalratri Special Bhajan नवरात्रि के सातवें दिन पूजी जाने वाली माँ कालरात्रि का स्वरूप अति भयानक किंतु उतना ही कल्याणकारी है। उनका शरीर काला, बाल बिखरे हुए और गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला है। वह गर्दभ (गधे) पर सवार होती हैं और उनके तीन नेत्रों से अग्नि की ज्वाला निकलती है। माँ कालरात्रि का जन्म तब हुआ जब दुष्ट राक्षस शुम्भ-निशुम्भ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में आतंक मचाया। देवताओं की प्रार्थना पर आदिशक्ति ने अपने क्रोध से एक अत्यंत तेजस्वी देवी को प्रकट किया, जिनका नाम पड़ा – कालरात्रि। उन्होंने रक्तबीज जैसे असुर का संहार किया, जिसकी रक्त की प्रत्येक बूंद से एक नया राक्षस उत्पन्न होता था। माँ ने उसका सारा रक्त पीकर उसे नष्ट किया और संसार को भय मुक्त किया। उनके इस रौद्र रूप को देखकर भी भक्त भयभीत नहीं होते क्योंकि वे जान जाते हैं कि माँ का यह रूप भी केवल अपने भक्तों की रक्षा के लिए है। जो श्रद्धा से उनकी पूजा करता है, उसे शत्रु बाधा, भूत-प्रेत, रोग और दरिद्रता से मुक्ति मिलती है।